Tuesday, April 12, 2022

इल्तिज़ा

 कुछ पन्ने, अधखुले...

भूली बिसरी यादोंके

हमने लौटाये थे 

अपनी ही

ख़स्ता-हाल जिन्दगी को

के सहेजकर रखना

हो सके तो ..

हो सकता है 

बुढापे में काम आ जाएं !


विशाल उवाच...


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